Saturday, July 22, 2023

विधायकों पर आपराधिक मामलों और उनकी संपत्ति को लेकर एडीआर की रिपोर्ट


इस रिपोर्ट से हमें आभास मिलता है कि हमारे देश के ज्यादातर निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का किरदार किस तरह का है, हालांकि उनके केवल दो पक्षों का ही इसमें जिक्र है. एक तो यह कि आपराधिक मामलों के लिहाज से उनका क्या रिकॉर्ड है, और दूसरा यह कि धन-संपत्ति के हिसाब से उनकी क्या स्थिति है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की हाल ही की इस रिपोर्ट में जन प्रतिनिधि के रूप में संदर्भ केवल विधायकों का है, और उसमें दिए गए सारे आंकड़े विधायकों के हालिया चुनाव लड़ने से पहले भारत निर्वाचन आयोग में दाखिल किए गए उनके हलफनामों से लिए गए हैं.

इसमें बताया गया है कि देश की विधानसभाओं में करीब 44 फीसदी प्रतिनिधियों यानी कोई 1,760 विधायकों ने खुद पर बने आपराधिक मामले होने की घोषणा की है. उनमें भी लगभग 28 फीसदी यानी 1,136 विधायकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं, जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित आरोप शामिल हैं.  

इसी तरह, विधायकों की संपत्ति के आंकड़े भी संकलित किए गए हैं. राज्य विधानसभाओं में प्रति विधायक औसत संपत्ति 13.63 करोड़ रु. पाई गई. लेकिन खुद पर आपराधिक मामले होने की घोषणा करने वाले विधायकों की औसत संपत्ति जहां 16.36 करोड़ रु. से अधिक है, वहीं ऐसे विधायकों की, जिन पर कोई आपराधिक मामला नहीं है, औसत संपत्ति 11.45 करोड़ रु. है. जिन विधायकों का विश्लेषण किया गया, उनमें से 2 फीसदी यानी 88 विधायक अरबपति पाए गए, जिनके पास 100 करोड़ रु. से अधिक की संपत्ति थी.

उक्त विश्लेषण एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) ने 28 राज्य विधानसभाओं और दो केंद्रशासित प्रदेशों के 4,033 विधायकों में से 4,001 विधायकों के हलफनामों के आधार पर किया है. वैसे तो देश के 28 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों के कुल मिलाकर 4,123 विधायक हैं जिनमें जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 90 सीटें फिलहाल खाली हैं.  

खुद पर बने आपराधिक मामलों की घोषणा करने वाले विधायकों में सबसे ज्यादा प्रतिशत केरल का है, जहां 135 में से 95 यानी 70 फीसदी विधायक ऐसे पाए गए. इसी तरह, बिहार के 242 में से 161 (यानी 67 फीसदी), दिल्ली के 70 में से 44 (यानी 63 फीसदी), महाराष्ट्र के 284 में से 175 (यानी 62 फीसदी), तेलंगाना के 118 में से 72 (यानी 61 फीसदी), और तमिलनाडु के 224 में से 134 (यानी 60 फीसदी) विधायकों ने अपने-अपने हलफनामे में खुद पर आपराधिक मामले होने की घोषणा की है. 

इसके अलावा, रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के 70 में से 37 (यानी 53 फीसदी), बिहार के 242 में से 122 (यानी 50 फीसदी), महाराष्ट्र के 284 में से 114 (यानी 40 फीसदी), झारखंड के 79 में से 31 (यानी 39 फीसदी), तेलंगाना के 118 में से 46 (यानी 39 फीसदी), और उत्तर प्रदेश के 403 में से 155 (यानी 38 फीसदी) विधायकों ने घोषणा की है कि उन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. 

रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित चिंताजनक आंकड़े भी सामने आए. इसमें बताया गया है कि आश्चर्यजनक रूप से 114 विधायकों ने घोषणा की है कि उन पर महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित मामले हैं. इनमें 14 विधायकों ने विशेष रूप से खुद पर बलात्कार (आइपीसी की धारा 376) से संबंधित मामले होने की घोषणा की है.

धन-संपत्ति के मामले में सबसे ज्यादा अमीर कर्नाटक के विधायक हैं, जहां 223 विधायकों में से 32 (यानी 14 फीसदी) अरबपति हैं. इसके बाद क्रम में अरुणाचल प्रदेश है, जिसके 59 में से 4 (यानी 7 फीसदी) और आंध्र प्रदेश के 174 में से 10 (यानी 6 फीसदी) विधायक अरबपति हैं. महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी 100 करोड़ रु. से अधिक की संपत्ति के मालिक विधायक हैं.

एडीआर की रिपोर्ट में सबसे अधिक और सबसे कम औसत संपत्ति वाले राज्यों की गणना भी की गई है. इसमें कर्नाटक अव्वल स्थिति में है, जिसके 223 विधायकों की औसत संपत्ति 64.39 करोड़ रु. है. इसके बाद आंध्र प्रदेश के 174 विधायकों की 28.24 करोड़ रु. और महाराष्ट्र के 284 विधायकों की 23.51 करोड़ रु. औसत संपत्ति है. इसके बरक्स, सबसे कम औसत संपत्ति त्रिपुरा के 59 विधायकों की 1.54 करोड़ रु., पश्चिम बंगाल के 293 विधायकों की 2.80 करोड़ रु. और केरल के 135 विधायकों की 3.15 करोड़ रु. है. 

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