Sunday, October 26, 2014

ज्ञान बोले तो इल्म हासिल करने की प्रक्रिया कोई आसान नहीं होती. इस दौरान इंसान कई भ्रांतियों का शिकार होता है.
जिस चीज को हम हकीकत मानते हैं, वह कई बार दरअसल उसके बारे में हमारी अवधारणा यानी समझ से बहुत अलग होती है. सोच-विचार में हम चाहे जितने भी धुरंधर हो जाएं, विभिन्न चीजों या प्रक्रियाओं के बारे में हमारी जांच-पड़ताल और अध्ययन चाहे कितना भी उच्च कोटि का क्यों न हो, फिर भी हकीकत को लेकर हमारी समझ में कुछ अंतर या कमियां रह ही जाती हैं. इस अंतर या कमियों को पाटने के लिए हम अक्सर भ्रांतियों या मिथ्या धारणाओं का सहारा लेते हैं. इसी से इनका प्रवेश हमारी जिंदगी में होता है. भ्रांतियों और मिथ्या धारणाओं का जन्म इसी तरह होता है.
तो भ्रांति, मिथ्या धारणा या गलत समझ वह शै है, जिस पर ज्ञान यानी इल्म का मुलम्मा चढ़ा रहता है. कुल मिलाकर, यह अज्ञानता ही होती है. जब तक नए तथ्य सामने नहीं आ जाते, इन भ्रांतियों को ही हकीकत माना जाता है. इस तरह देखें तो जिसे हम ज्ञान कहते हैं, वह अवधारणाओं और मिथ्या धारणाओं का मिश्रण है.
इसीलिए ज्ञानी लोगों ने कहा है कि हमें नए और पुराने तथ्यों के आधार पर अपनी सारी अवधारणाओं को लगातार परखते रहना चाहिए. यही नहीं, इसके साथ-साथ अपनी मिथ्या धारणाओं को दुरुस्त करने की कोशिश भी करते रहना चाहिए.
नए ज्ञान या इल्म को हासिल करने की जरूरत तभी पैदा होती है जब पुरानी अवधारणाओं से मेल न खाने वाले नए तथ्य सामने आते हैं.

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home