नीलम कटारा इंटरव्यू
उनमें सचमुच गजब का आत्मविश्वास है. अपने पुत्र के कातिलों को सजा दिलाने के लिए लगातार 14 साल तक कोर्ट-कचहरियों के चक्कर काटने के बावजूद नीलम कटारा का हौसला डिगा नहीं. इसके मद्देनजर उनके जबर्दस्त साहस को सलाम कहना पड़ेगा. आज एक दैनिक में छपा उनका इंटरव्यू देश में मौजूदा राजनैतिक व्यवस्था की कलई खोलता है. उनके अनुभव आम लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.
उन्हें पूछा गया कि क्या यह मामला ऑनर किलिंग के साथ धनबल, बाहुबल के अहंकार का भी था. उनका कहना था. ‘‘बिल्कुल था... मैं राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ भी लड़ना चाहूंगी... आप देखिए, केंद्रीय मंत्रिमंडल में बलात्कार का एक आरोपी पूरे दो साल रहा. कोई कुछ नहीं कर पाया... विधायक, सांसद जैसे पदों पर बैठे लोगों के ऊपर तो इस तरह के गंभीर आरोप लगना ही इस्तीफे के लिए पर्याप्त कारण होना चाहिए. अगर ऐसे लोग एक चुनाव नहीं लड़ेंगे, तो क्या हो जाएगा? विकास या विशाल यादव को भी यही लगता होगा कि उनके पिता के खिलाफ कई मुकदमे होने के बावजूद वह सांसद बन सकते हैं, तो अपराध करने से उनका क्या बिगड़ जाएगा? उनकी पूरी भाव-भंगिमा में यह अहंकार झलकता रहा है. मैं अब भी आश्वस्त नहीं हूं कि यह कौन सुनिश्चित करेगा कि जितने साल तक उन्हें जेल में रखे जाने की सजा हुई है, उतने साल वे रहेंगे.’’
उन्होंने सच ही कहा कि ‘‘राजनीति और अपराध का घालमेल होने से इस केस में मीडिया की दिलचस्पी बनी हुई थी. आम आदमी अपराधी किस्म के नेताओं से घृणा करता है.’’
राजनैतिक दलों ने उनकी कभी मदद नहीं की. कांग्रेस की नेता मोहसिना किदवई को वे व्यक्तिगत तौर पर जानती थीं क्योंकि लखनऊ में वे उनकी बेटी के साथ पढ़ी थीं. नीतीश की तेरहवीं में वे आई थीं. ऐसे ही कुछ और भी थे, पर वह केवल मिलने तक सीमित था. एक और नेता, जो उस समय भाजपा सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री थे, उनके सबसे नजदीकी सहायक को उन्होंने फोन किया. वे मिलने भी आए, लेकिन उन्होंने हैरतअंगेज सलाह दी. कहा कि आप मीडिया के चक्कर में ज्यादा न पड़ें, इससे आप परेशानी में भी आ सकती हैं. शुक्र है, ‘‘मैंने उनकी सलाह नहीं मानी, वरना यह केस तो आगे बढ़ता ही नहीं.’’
उन्हें देश की ऐसी बेटियों से शिकायत है, जो संपन्न घरों से हैं, अच्छे स्कूल-कॉलेज से पढ़ी हैं, अपने पैरों पर खड़े होने में सक्षम हैं, बावजूद इसके सच बोलने की हिम्मत नहीं करतीं. भारती यादव के व्यवहार से ज्यादा उन्हें अपने बेटे नीतीश से निराशा हुई कि उसने ऐसी लड़की चुनी. ‘‘भारती को तो पता था उसका परिवार कैसा है? अपने भविष्य के लिए वह कुछ भी करती, पर नीतीश और अपने संबंधों के बारे में सच तो बोल सकती थी. आखिर उसकी वजह से नीतीश की जान गई थी.’’
उन्होंने बताया कि वे इस लड़ाई में कैसे टिकी रहीं. ‘‘शिक्षा बहुत बड़ा कारण है. मुझे घर या स्कूल में जो शिक्षा मिली, उसने मुझे हमेशा सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया. मैं चाहे कोर्ट में वकील हों या जानने वाले, उनसे सवाल पूछती रहती थी. मुझमें यह आत्मविश्वास था.’’ ऑनर किलिंग के खिलाफ अभियान से जुड़ने को लेकर उनका कहना था कि ‘‘बहुत से सुझाव हैं, पर अभी अंतिम रूप से कुछ तय नहीं है. स्वयंसेवी संगठन सेमिनार वगैरह करते रहते हैं और उनमें मुझे बुलाया जाता है, तो मैं इस मसले को उठाना चाहूंगी और चाहूंगी कि मीडिया भी इसमें साथ दे.’’
साभार: दैनिक हिन्दुस्तान, 10 अक्तूबर 2016


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