लेकिन कई सरहदों पर है खुलेआम आवाजाही भी
लेकिन कई सरहदों पर है खुलेआम आवाजाही भी
अपनी पिछली पोस्ट में मैंने कहा था कि काश! ऐसे गांव हर सरहद पर हों, जिनके आर-पार कोई भी आ-जा सकता है. आज की अंतरनिर्भर दुनिया में इसी तरह की सरहदों की जरूरत है ताकि जो पैसा सुरक्षा बलों और हथियारों पर खर्च किया जाता है वह प्रकृति के संरक्षण और मनुष्य की जिंदगी को सुधारने में लगे. लेकिन दुनिया में कॉर्पोरेट पूंजीवादी व्यवस्था को यह रास नहीं आता, जिसके लिए मुनाफा कमाना सबसे महत्वपूर्ण काम है. विकासशील और गरीब देशों को ही इस मामले में समझने की जरूरत है, जहां की लगभग सभी राजनैतिक पार्टियां कॉर्पोरेट पूंजीवादी व्यवस्था के हितों की पूर्ति में लगी हुई हैं. सारी सरहदें और युद्ध यहीं हैं. जरूरत ऐसा समाज बनाने की है जो प्रकृति हितैषी और मनुष्य हितैषी हो.
बहरहाल, मैं यूरोप के ऐसे ही कुछ सरहदी कस्बों / नगरों की फोटुएं पोस्ट कर रहा हूं, जिनके आर-पार आने-जाने में हमें कोई परेशानी नहीं हुई. लगा ही नहीं, हम तीन अलग-अलग देशों में घूम रहे हैं. पहली तीन फोटुएं एवियन नामक फ्रांसीसी कस्बे की हैं. यह हॉलिडे रेसॉर्ट स्विटजरलैंड और फ्रांस के बीच सीमा का काम देती लेक जेनेवा के पार स्थित है. यहां हम स्विटजरलैंड के चौथे सबसे बड़े शहर और इंटरनेशनल अोलंपिक कमेटी के मुख्यालय लॉवज़ैन से छोटे-से जहाज में बैठकर गए थे. पहली फोटो एवियन में बने युद्ध स्मारक (वॉर मेमोरियल) की है, तो दूसरी में हम एक बड़े बैंक के बाहर बैठे हैं और तीसरी पानी के उस स्रोत की है, जिसके लिए एवियन मशहूर है. पूरे यूरोप में इसी नाम से यह बोतलबंद पानी बिकता है.
चौथी फोटो स्विटजरलैंड के पार सीमा से 25-30 किमी इटली में स्थित महानगर मिलान की है, जिसे फैशन और डिजाइन के मामले में दुनिया का केंद्र माना जाता है. रेलगाड़ी में लॉवज़ैन से कोई 600 किमी दूर इटली में ही स्थित नहरों और पुलों से जुड़े 117 छोटे-छोटे द्वीपों मे पसरे वेनिस की ओर जाते हुए यह बीच का पड़ाव है.
पांचवीं फोटो लेक जेनेवा पार करके मोटरबोट से फ्रांस के ही 14वीं सदी के छोटे-से प्राचीन कस्बे यवोआ की ओर जाते समय की है. और छठी फोटो में हम जेनेवा और एवियन के बीच बसे यवोआ के टूरिस्ट ऑफिस के बाहर बैठे हैं.

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