सबसे खतरनाक दौर की ओर बढ़ रही दुनिया
परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली संस्था स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपरी) ने नई चेतावनी जारी की है. संस्था ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि परमाणु हथियारों के जखीरे में वृद्धि होते जाने से "दुनिया मानव इतिहास के सबसे खतरनाक दौर की ओर बढ़ रही है."
आज जब अंतरराष्ट्रीय संबंध बिगड़ते जा रहे हैं और परमाणु खनखनाहट तेज हो गई है, सीपरी ने दुनिया भर में ऐसे 12,512 हथियार होने का अनुमान लगाया है, जिनमें से 9,576 तो सैन्य प्रयोग के लिए तैनात हैं. पिछले साल के मुकाबले इस संख्या में 86 की वृद्धि हुई है. चीन ने पिछले एक साल में 60 परमाणु हथियार बढ़ाए हैं. इस मामले में वह रूस, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और भारत से कहीं आगे है, जिनके खाते में क्रमशः 12, 5, 5 और 4 नए हथियार दर्ज हैं.
अक्सर अनुमान लगाया जाता है कि परमाणु बम से संपन्न 9 देशों में कोई 90 प्रतिशत परमाणु हथियार रूस और अमेरिका के पास हैं. इस तरह, आज की तारीख में 4,489 ऐसे हथियार रूस के और 3,708 अमेरिका के शस्त्रागार में हैं. इसके बाद 410 चीन, 290 फ्रांस, 225 ब्रिटेन, 170 पाकिस्तान, 164 भारत, 90 इस्राएल और 30 उत्तर कोरिया के परमाणु भंडार में हैं.
सीपरी का मानना है कि अमेरिका और रूस ने करीब 2,000 परमाणु हथियारों को हाई अलर्ट यानी तुरंत इस्तेमाल के लिए रखा है. यानी ये हथियार मिसाइलों में फिट हैं या एयरबेस पर तैनात किए गए हैं. संस्था की उक्त रिपोर्ट में इस साल जनवरी तक के अनुमान हैं.
जिस तरह से परमाणु हथियारों का खतरा रोज-ब-रोज बढ़ता जा रहा है, उसे रोकने के लिए दुनिया में हर जगह लोगों को बड़े पैमाने पर एकजुट होना होगा और इसके खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी.
उन्हें मांग करनी होगी कि मौजूदा परमाणु शक्तियां अपने सभी परमाणु और दूसरे खतरनाक हथियारों को फौरन नष्ट करें और आगे से ऐसे किसी हथियार को न बनाने का वादा करें. उन्हें यह मांग भी करनी होगी कि ये शक्तियां हर साल अपने रक्षा बजट की आधी रकम संयुक्त राष्ट्र महासभा के सुपुर्द करें. महासभा दुनिया में देशों के बीच मौजूद आपसी टकरावों को छह माह के अंदर हल करने का काम करे.

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home